| 000 | 01416nam a22002177a 4500 | ||
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| 005 | 20260207201519.0 | ||
| 008 | 260207b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789371979030 | ||
| 082 | _a891.433 TRI | ||
| 100 | _aTripathi, Suryakant | ||
| 245 | _aNirupama = निरुपमा | ||
| 260 |
_aChennai: _bEkada, _c2025. |
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| 300 |
_a126p.: _bpbk.: _c22 cm. |
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| 520 | _aरचना क्रम की दृष्टि से निरुपमा निराला का चौथा उपन्यास है। पहले के तीन उपन्यासों-अप्सरा, अलका और प्रभावती की तरह इस उपन्यास का कथानक भी घटना-प्रधान है। स्वतंत्रता आन्दोलन के दिनों में, खासकर बंगाल में समाज-सुधार की लहर पूरे उभार पर थी। इसी समायावधि में निराला ने निरूपमा उपन्यास की रचना की। | ||
| 650 | _aNirala, Suryakant Tripathi, 1896–1961—Criticism and Interpretation | ||
| 650 | _aHindi Fiction | ||
| 650 | _aWomen—India—Fiction | ||
| 650 | _aBengal (India)—Social Conditions—Fiction | ||
| 650 | _aNationalism—India—Fiction | ||
| 942 | _cHIN | ||
| 999 |
_c64326 _d64326 |
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