| 000 | 02268nam a22002177a 4500 | ||
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| 005 | 20260207155056.0 | ||
| 008 | 260207b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789357767651 | ||
| 082 | _a891.433 PRE | ||
| 100 | _aPremchand, Munshi | ||
| 245 | _aGodan = गोदान | ||
| 260 |
_aChennai: _bEkada, _c2025. |
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| 300 |
_a394p.: _bpbk.: _c22 cm. |
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| 520 | _a‘उपन्यास सम्राट’ की उपाधि पानेवाले मुंशी प्रेमचंद हिन्दी के सबसे अधिक लोकप्रिय लेखक हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में चैदह उपन्यास, ढाई सौ कहानियां और अनगिनत निबंध लिखे। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुछ अन्य भाषाओं की पुस्तकों को हिन्दी में अनूदित किया। उनका सारा लेखन यथार्थ पर आधारित था और उसके माध्यम से उस समय की सामाजिक स्थितियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उनका एक प्रयास था। बाल-विवाह, गरीबी, भुखमरी, ज़मींदारों के अत्याचार अक्सर उनके लेखन का विषय थे।1936 में लिखा गोदान उनका आखिरी उपन्यास है जिसे सबसे महत्वपूर्ण कृति माना जाता है। गोदान गांव में रहनेवाले उस परिवार की कहानी है जो कठिनाइयों का सामना करते हुए हिम्मत नहीं हारता। | ||
| 650 | _aPremchand, 1880–1936—Criticism and Interpretation | ||
| 650 | _aHindi Fiction | ||
| 650 | _aPeasantry—India—Fiction | ||
| 650 | _aRural Life—India—Fiction | ||
| 650 | _aSocial Realism—India—Fiction | ||
| 942 | _cHIN | ||
| 999 |
_c64310 _d64310 |
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