| 000 | 03006nam a22002297a 4500 | ||
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| 005 | 20260205181506.0 | ||
| 008 | 260205b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789371978064 | ||
| 082 | _a891.4321 PRA | ||
| 100 | _aPrasad, Jai Shankar | ||
| 245 | _aChandragupta = चन्द्रगुप्त | ||
| 260 |
_aChennai: _bEkada, _c2025. |
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| 300 |
_a182p.: _bpbk.: _c20 cm. |
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| 520 | _aभारत का राजनीतिक इतिहास शुरू से ही एक ओर राजाओं के आपसी वैरविरोध और फूट से भरा पड़ा है तो दूसरी ओर उस में राजघरानों की विलासिता, पारिवारिक कलह, ईर्ष्या आदि की भी कमी नहीं रही है, जिन के कारण यहां शकों, हूणों, मुगलों आदि के हमले होते रहे और हम सदियों तक गुलाम रहे. इस का यह मतलब नहीं है कि हम भारतीयों में साहस और बल की कमी थी या हम अपनी कमजोरियों पर विजय नहीं पा सकते थे . हम बहुत कुछ कर सकते थे, जैसा कि चंद्रगुप्त ने किया था. मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त ने अपनी सूझबूझ और बाहुबल पर, भारत की ओर बढ़ते विदेशी हमलावर सिकंदर को रोका था. इसी चंद्रगुप्त को केंद्र में रख कर जयशंकर ' प्रसाद ' ने 'चंद्रगुप्त' शीर्षक से नाटक की रचना की है, जिस में भारतीय इतिहास, दर्शन एवं संस्कृति की झलक मिलती है. प्रसंगवश, प्रेम, सौंदर्य आदि सरस अनुभूतियों से परिपूर्ण यह नाटक इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों और छात्रों के लिए ही नहीं, अपितु सामान्य पाठकों के लिए भी समान रूप से पठनीय और प्रेरणादायक है।" | ||
| 650 | _aHindi Drama | ||
| 650 | _aPrasad, Jaishankar, 1889–1937—Criticism and Interpretation | ||
| 650 | _aKings and Rulers—India—Drama | ||
| 650 | _aIndian Culture—Drama | ||
| 650 | _aChandragupta Maurya, Emperor of India, 4th century BCE—Drama | ||
| 650 | _aNationalism—India—Drama | ||
| 942 | _cHIN | ||
| 999 |
_c64299 _d64299 |
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