| 000 | 02819nam a22002297a 4500 | ||
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| 005 | 20260205165040.0 | ||
| 008 | 260205b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789371972932 | ||
| 082 | _a320.954 GAN | ||
| 100 | _aGandhi, Mohandas Karamchand | ||
| 245 | _aHind swaraj = हिन्द स्वराज | ||
| 260 |
_aChennai: _bEkada, _c2025. |
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| 300 |
_a90p.: _bpbk.: _c22 cm. |
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| 520 | _aसन् 1909 में लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते हुए जहाज पर हिंदुस्तानियों के हिंसावादी पंथ को और उसी विचारधारावाले दक्षिण अफ्रीका के एक वर्ग को दिए गए जवाब के रूप में लिखी यह पुस्तक पहले-पहल दक्षिण अफ्रीका में छपनेवाले साप्ताहिक ‘इंडियन ओपीनियन’ में प्रगट हुई थी। लिखने के एक सौ वर्ष बाद भी यह इतनी प्रासंगिक और विचारशील कृति है कि यह बालक के हाथ में भी दी जा सकती है। यह द्वेषधर्म की जगह प्रेमधर्म सिखाती है; हिंसा की जगह आत्म-बलिदान को रखती है; पशुबल से टक्कर लेने के लिए आत्मबल को खड़ा करती है। हिंदुस्तान अगर प्रेम के सिद्धांत को अपने धर्म के एक सक्रिय अंश के रूप में स्वीकार करे और उसे अपनी राजनीति में शामिल करे, तो स्वराज स्वर्ग से हिंदुस्तान की धरती पर उतरेगा। ‘हिंद स्वराज’ में बताए हुए संपूर्ण जीवन-सिद्धांत को आचरण में लाने से राष्ट्र के सामने जो प्रश्न हैं, समस्याएँ हैं, उनका उत्तर और समाधान खोजने में मदद मिलेगी। | ||
| 650 | _aGandhi, Mahatma, 1869–1948—Political and Social Views | ||
| 650 | _aSwaraj | ||
| 650 | _aNonviolence—Political Aspects | ||
| 650 | _aSocial Reform—India | ||
| 650 | _aIndian Home Rule | ||
| 650 | _aNationalism—India—Philosophy | ||
| 942 | _cHIN | ||
| 999 |
_c64286 _d64286 |
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