000 01649 a2200217 4500
008 241227b |||||||| |||| 00| 0 eng d
020 _a9789360862046
082 _a891.734 KUP
100 _aKuprin, Aleksandr
245 _aOlesya: tatha anya kahaniyan=ओलेस्या: तथा अन्य कहानियाँ
260 _aNew Delhi:
_bRajkamal Prakashan,
_c2024.
300 _a270p.:
_bhbk.:
_c20 cm.
520 _aतोल्स्तोय, गोर्की और चेख़ॅव की ही तरह रूसी समाज और बृहत्तर मानवीय नियति के द्रष्टा लेखक कुप्रिन की इन कहानियों में उनके समय की अनेक ऐसी स्थितियों के विवरण हैं जिनकी भयावहता स्तब्ध कर देती है। वस्तुत: ये कहानियाँ मानवीय जीवन को क्षत करने वाले विचारों और परि​स्थितियों के विरुद्ध खड़ी ऐसी रचनाएँ हैं जिन्हें एक बार पढ़ लेने के बाद भुलाना मुमकिन नहीं है। https://rajkamalprakashan.com/olesya-tatha-anya-kahaniyan.html
650 _a Short Stories
650 _a Soviet Union Writers
650 _aRussian Literature
650 _a Hindi Literature
650 _a Translation
700 _aVerma, Nirmal
_eTranslator
942 _cTD
_2ddc
999 _c61894
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