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Chandragupta = चन्द्रगुप्त

By: Material type: TextPublication details: Chennai: Ekada, 2025.Description: 182p.: pbk.: 20 cmISBN:
  • 9789371978064
Subject(s): DDC classification:
  • 891.4321 PRA
Summary: भारत का राजनीतिक इतिहास शुरू से ही एक ओर राजाओं के आपसी वैरविरोध और फूट से भरा पड़ा है तो दूसरी ओर उस में राजघरानों की विलासिता, पारिवारिक कलह, ईर्ष्या आदि की भी कमी नहीं रही है, जिन के कारण यहां शकों, हूणों, मुगलों आदि के हमले होते रहे और हम सदियों तक गुलाम रहे. इस का यह मतलब नहीं है कि हम भारतीयों में साहस और बल की कमी थी या हम अपनी कमजोरियों पर विजय नहीं पा सकते थे . हम बहुत कुछ कर सकते थे, जैसा कि चंद्रगुप्त ने किया था. मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त ने अपनी सूझबूझ और बाहुबल पर, भारत की ओर बढ़ते विदेशी हमलावर सिकंदर को रोका था. इसी चंद्रगुप्त को केंद्र में रख कर जयशंकर ' प्रसाद ' ने 'चंद्रगुप्त' शीर्षक से नाटक की रचना की है, जिस में भारतीय इतिहास, दर्शन एवं संस्कृति की झलक मिलती है. प्रसंगवश, प्रेम, सौंदर्य आदि सरस अनुभूतियों से परिपूर्ण यह नाटक इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों और छात्रों के लिए ही नहीं, अपितु सामान्य पाठकों के लिए भी समान रूप से पठनीय और प्रेरणादायक है।"
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Hindi Books IIT Gandhinagar Hindi General 891.4321 PRA (Browse shelf(Opens below)) 1 Available 036651

भारत का राजनीतिक इतिहास शुरू से ही एक ओर राजाओं के आपसी वैरविरोध और फूट से भरा पड़ा है तो दूसरी ओर उस में राजघरानों की विलासिता, पारिवारिक कलह, ईर्ष्या आदि की भी कमी नहीं रही है, जिन के कारण यहां शकों, हूणों, मुगलों आदि के हमले होते रहे और हम सदियों तक गुलाम रहे. इस का यह मतलब नहीं है कि हम भारतीयों में साहस और बल की कमी थी या हम अपनी कमजोरियों पर विजय नहीं पा सकते थे . हम बहुत कुछ कर सकते थे, जैसा कि चंद्रगुप्त ने किया था. मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त ने अपनी सूझबूझ और बाहुबल पर, भारत की ओर बढ़ते विदेशी हमलावर सिकंदर को रोका था. इसी चंद्रगुप्त को केंद्र में रख कर जयशंकर ' प्रसाद ' ने 'चंद्रगुप्त' शीर्षक से नाटक की रचना की है, जिस में भारतीय इतिहास, दर्शन एवं संस्कृति की झलक मिलती है. प्रसंगवश, प्रेम, सौंदर्य आदि सरस अनुभूतियों से परिपूर्ण यह नाटक इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों और छात्रों के लिए ही नहीं, अपितु सामान्य पाठकों के लिए भी समान रूप से पठनीय और प्रेरणादायक है।"

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