TY - GEN AU - Rind, P.P. Srivastava AU - Shadab, Akhtrul Wasey Moine TI - Sadiyon ke par=सदियों के पार SN - 9789857752985 U1 - 891.43171 RIN PY - 2024/// CY - Delhi PB - Vani Prakashan KW - Hindi Literature KW - Shayari- Geet KW - Poetry KW - Ghazal N2 - रिंद' साहब के शेर भाव जगत की जटिलताओं और अनुभव की बहुरूपता का एक संगम पेश करते हैं। बीच-बीच में कहीं उनका समय भी अपना सिर उठाकर खड़ा हो जाता है और कहीं सामाजिक विद्रूपता भी कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है । उनकी शायरी को न तो केवल अन्तर्मन की शायरी कहा जा सकता है और न केवल ज़ालिम ज़माने के अनुभवों पर आधारित शायरी कहा जा सकता है दरअसल उसकी विविधता उसकी विशेषता है। उनकी शायरी उर्दू ग़ज़ल की एक बुनियादी माँग सांकेतिकता और बिम्बात्मकता पर पूरा ध्यान देती है । https://www.vaniprakashan.com/home/product_view/7420/Sadiyon-Ke-Par ER -