TY - GEN AU - Dubey, Ashutosh TI - Asambhav saransh=असम्भव सारांश SN - 9789357757119 U1 - 891.4317 DUB PY - 2024/// CY - Delhi PB - Vani Prakashan KW - Hindi Literature KW - Poetry KW - Poetry Collection KW - Nai Kavita KW - Nature N2 - आशुतोष दुबे की कुछ कविताओं में प्रथमदृष्ट्या ही वह दिखाई दे जाता है जो उन सरीखे जागरूक कवि में अप्रत्याशित नहीं है-कवि-कर्म या काव्य-कला (ars poetica) की दुविधाओं का अहसास । 'सारांश' कवि के जीवन और कृतित्व के मूल तत्त्व और परिणाम की व्याख्या इस संकेत से करती है कि पूरी ज़िन्दगी के राख हो जाने के बाद ही शायद पता चले कि कोई सृजेता किसी महाकाव्य का निष्कर्ष था या एक छोटी, नुकीली कविता का सारांश । उपलब्धि क्या है-महाकाव्यात्मक, या नावक के तीर जैसी कोई रचना? 'समस्यापूर्ति' में आशुतोष दुबे महाकाव्य और कविता के बाद उस एक पंक्ति पर आते हैं जो अप्रत्याशित की प्रतीक्षा में अपनी दूसरी सहेलियों की बाट जोह रही है जो उसे ('सार्थकता' देने के लिए) अपने उजाले और अँधेरे में ले जायेंगी। 'शब्द-पुरुष' में, जो सृजन-देवता ही हो सकता है, वे शब्दों की पीड़ा और उल्लास, सूझों-शिराओं में कौंधते-बहते दिक्काल के अजम्न विद्युत-प्रवाह तक पहुँचते हैं और अन्त में, 'विन्यास' में, वे, लीलामग्न शब्द से परे, सही या गलत जगहों पर लगे पूर्ण और अर्धविराम तथा बिन्दुओं जैसे शब्देतर चिह्नों और गिरती हुई अर्थ की छाया को देखते हैं। यदि इन कविताओं के निहितार्थों तक जायें तो आशुतोष दुबे महाकाव्य से लेकर विरामचिह्नों तक के, सृष्टि से लेकर सिकता-कण तक के और समष्टि से लेकर व्यष्टि तक के ऐसे कवि नज़र आते हैं जिसकी दृष्टि सकल से लेकर अंश तक है-या उसकी आकांक्षा ऐसा कवि बनने की है। https://vaniprakashan.com/home/product_view/3659/Asambhav-Saransh ER -