Raj yoga = राजयोग
Material type:
TextPublication details: Bengaluru: Indie Press, 2025.Description: viii, 284p.: pbk.: 20 cmISBN: - 9789371975704
- 181.48 VIV
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Date due | Barcode | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
Hindi Books
|
IIT Gandhinagar Hindi | General | 181.48 VIV (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Checked out | 21/03/2026 | 036680 |
Browsing IIT Gandhinagar shelves,Shelving location: Hindi,Collection: General Close shelf browser (Hides shelf browser)
|
|
|
|
|
|
|
||
| 181.48 VIV Bhakti yoga = भक्तियोग | 181.48 VIV Gyan yoga = ज्ञान योग | 181.48 VIV Karm yoga = कर्मयोग | 181.48 VIV Raj yoga = राजयोग | 294.5924047 GAN Anasakti yoga: Bhagavad Gita, Mahatma Gandhi ke anusaar = अनासक्तियोग: भगवद गीता, महात्मा गांधी के अनुसार | 294.5925 BHA Shrimadbhagavat mahahpuran = श्रीमद्भागवत-महापुराण | 305.51220954 AMB Jatipratha unmoolan aur Mahatma Gandhi ko diya gaya uttar = जातिप्रथा उन्मूलन और महात्मा गाँधी को दिया गया उत्तर |
राजयोग-विद्या इस सत्य को प्राप्त करने के लिए, मानव के समक्ष यथार्थ, व्यावहारिक और साधनोपयोगी वैज्ञानिक प्रणाली रखने का प्रस्ताव करती है। पहले तो प्रत्येक विद्या के अनुसंधान और साधन की प्रणाली पृथक्-पृथक् है। यदि तुम खगोलशास्त्री होने की इच्छा करो और बैठे-बैठे केवल ‘खगोलशास्त्र खगोलशास्त्र’ कहकर चिल्लाते रहो, तो तुम कभी खगोलशास्त्र के अधिकारी न हो सकोगे। रसायनशास्त्र के संबंध में भी ऐसा ही है; उसमें भी एक निर्दिष्ट प्रणाली का अनुसरण करना होगा; प्रयोगशाला में जाकर विभिन्न द्रव्यादि लेने होंगे, उनको एकत्र करना होगा, उन्हें उचित अनुपात में मिलाना होगा, फिर उनको लेकर उनकी परीक्षा करनी होगी, तब कहीं तुम रसायनविज्ञ हो सकोगे। यदि तुम खगोलशास्त्रज्ञ होना चाहते हो, तो तुम्हें वेधशाला में जाकर दूरबीन की सहायता से तारों और ग्रहों का पर्यवेक्षण करके उनके विषय में आलोचना करनी होगी, तभी तुम खगोलशास्त्रज्ञ हो सकोगे
There are no comments on this title.