Kavve aur kala pani = कव्वे और काला पानी
Publication details: New Delhi: Rajkamal Prakashan, 2024.Description: 214p.: hbk.: 22 cmISBN:- 9789360868116
- 891.4330108 VER
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Date due | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.4330108 VER (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Checked out | 10/02/2026 | 036244 |
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| 891.43301 SAN Volga se Ganga=वोल्गा से गंगा | 891.43301 SAN Gram aur gramin= ग्राम और ग्रामीण | 891.43301 VER Pratinidhi kahaniyan=प्रतिनिधि कहानियाँ | 891.4330108 VER Kavve aur kala pani = कव्वे और काला पानी | 891.43309 VIS Rashtrineta Dr. B.R. Ambedkar=राष्ट्रनेता डॉ. बी.आर. अंबेडकर | 891.4335 MUN Bade ghar ki beti tatha anya kahaniyan = बड़े घर की बेटी तथा अन्य कहानियां | 891.4335 PRE Karmbhumi = कर्मभूमि |
निर्मल वर्मा ने हिन्दी कहानी को एक अत्यन्त संवेदनशील, सक्षम और पारदर्शी भाषा दी, और उसमें मनुष्य की आन्तरिक रिक्तियों को दृश्यमान किया। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ सिर्फ़ पाठकीय अनुभव तक सीमित नहीं रहतीं, हमारे लिए वे एक समूचा मानवीय अनुभव हो जाती हैं—देर तक साथ रहनेवाला एक समूचा अनुभव।
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1985) से सम्मानित ‘कव्वे और काला पानी’ (1983) में उनकी सात कहानियाँ शामिल हैं। इनमें से कुछ कहानियों की पृष्ठभूमि भारतीय है तो कुछ कहानियाँ हमें यूरोपीय ज़मीन की उदासियों से परिचित कराती हैं। यह निर्मल जी की संवेदना का समूचापन ही है कि इससे पाठक की अनुभूति कहीं विभाजित नहीं होती। मानवीय पीड़ा का स्वर कहीं दो-फाँक नहीं होता।
मानव-सम्बन्धों में आज जो एक ठहराव, ठंडापन, उदासी, बेचारगी और व्यर्थता बोध है, वह इन कहानियों के माध्यम से हमें गहरे तक झकझोरता है और हमें उन अनुभवों तक ले जाता है, जो एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं। घटनाएँ इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं, जितना कि वह परिवेश जो इन कहानियों की पंक्तियों से उठकर हमारे भीतर चला आता है। हर कहानी एक गूँज की तरह कहीं भीतर ठहर जाती है।
इस संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी ने अपने समय में व्यापक प्रतिक्रियाओं और अकसर बहसों को भी जन्म दिया। अपनी कलात्मकता में वे आज भी उतनी ही नई हैं।
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