Rajasthani ranivas=राजस्थानी रानिवास
Publication details: Delhi: Radhakrishna Prakashan, 2025.Description: 318 p.: pbk.: 23 cmISBN:- 9789348157331
- 891.43371 SAN
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.43371 SAN (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 035932 |
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| 891.43371 SAN Divodas= दिवोदास | 891.43371 SAN Baisvin sadi= बाईसवीं सदी | 891.43371 SAN Jeene ke liye= जीने के लिए | 891.43371 SAN Rajasthani ranivas=राजस्थानी रानिवास | 891.43371 SAN Singh senapati=सिंह सेनापति | 891.43371 SAR Girte sambhalte = गिरते सम्भलते | 891.43371 SAR Kuch thahre thahre se hain pal =कुछ ठहरे ठहरे सें हैं पल |
‘राजस्थानी रनिवास’ राहुल सांकृत्यायन की एक बहुचर्चित कृति है। भारतीय समाज से जुड़ा एक अत्यन्त प्रासंगिक प्रश्न इसके केन्द्र में है—पुरुष प्रधान सामन्ती समाज में स्त्रियों की परवशता।
राहुल उन लेखकों में से थे जो लेखन को सामाजिक परिष्कार की संगति में देखते थे। इसलिए उन्होंने चुन-चुनकर उन विषयों पर लिखा जिनकी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना वे आवश्यक समझते थे। ऐसे विषयों में एक तरफ इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली चीजें थीं तो दूसरी तरफ वे चीजें जो हमारी उन्नति की राह में बाधा।
प्रस्तुत पुस्तक में राहुल ने जो विषय उठाया है वह दूसरे प्रकार का है। पुस्तक की नायिका गौरी के मुख से वे राजस्थानी रनिवासों के सात पर्दों में रहने वाली रानियों-ठकुरानियों की दुःख भरी कहानी और वहां के पुरुषों की स्वेच्छाचारिता को वे पूरी साफगोई से उजागर करते हैं। स्त्रियों पर पुरुषों के नियंत्रण को सामन्ती समाज अपने वैभव और गौरव के रूप में पेश करता रहा है, लेकिन उसकी अमानवीय वास्तविकता किसी भी सहृदय व्यक्ति को बेचैन कर देगी। ‘राजस्थानी रनिवास’ इसी बेचैनी को बढ़ाने के उद्देश्य से रची गयी कृति है जिसका सन्देश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
https://rajkamalprakashan.com/rajasthani-ranivas.html
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