Divodas= दिवोदास
Publication details: Delhi: Prabhakar Prakashan 2024Description: 123 p.: pbk.: 19 cmISBN:- 9789356824652
- 891.43371 SAN
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.43371 SAN (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 035917 |
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| 891.43371 SAH Pratinidhi kavitayen = प्रतिनिधि कविताये | 891.43371 SAH Kuch pate, kuch citthiyan = कुछ पते, कुछ चिट्ठियां | 891.43371 SAN Prarthana=प्रार्थना | 891.43371 SAN Divodas= दिवोदास | 891.43371 SAN Baisvin sadi= बाईसवीं सदी | 891.43371 SAN Jeene ke liye= जीने के लिए | 891.43371 SAN Rajasthani ranivas=राजस्थानी रानिवास |
अपने जन को सब तरह से सुखी और समृद्ध बनाने का निश्चय दिवोदास ने कर लिया था। अपने परिवार के लिए उसे चिन्ता नहीं थी। पिता द्वारा अर्जित पशु और धन उसके पास पर्याप्त था। अपनी स्वाभाविक रुचि तथा ऋषि की शिक्षा के कारण उसमें कोई व्यसन नहीं था। सरल, परिश्रमी जीवन उसे पसन्द था। पर, जब तक सारा जन कष्ट से मुक्त न हो, तब तक वह कैसे चैन ले सकता था? विपाश (व्यास), शतद्रु और परुष्णी के बीच की अपनी जन्मभूमि में वह केवल अपने पशुओं के साथ विचरण नहीं करता था, बल्कि अपने लोगों को समीप देखने, उनके साथ घनिष्ठता स्थापित करने के लिए भी ऐसा करते समय एक बार उसका ग्राम (समूह) परुष्णी (रावी) के किनारे बहुत उत्तर में पड़ा हुआ था। राजा का कर्तव्य था, लोगों के पारस्परिक झगड़े को दूर करना
https://www.amazon.in/Divodas-Rahul-Sankrityayan/dp/9356824657
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