Yuvraj chunda=युवराज चूंडा
Publication details: Delhi: Rajkamal Prakashan, 2024.Description: 159p.: hbk.; 21 cmISBN:- 9788126705771
- 891.4337 VER
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.4337 VER (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 034892 |
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| 891.4337 SOB Daar se bichchudi = डार से बिछुड़ी | 891.4337 SOB Surajmukhi andhere ke = सूरजमुखी अँधेरे के | 891.4337 SOB Gujarat Pakistan se Gujarat Hindustan = गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान | 891.4337 VER Yuvraj chunda=युवराज चूंडा | 891.4337 YAS Dada komred = दादा कॉमरेड | 891.433709 UMA Yashpal ke upanyas manushya ke roop mein nari chitran = यशपाल के उपन्यास मनुष्य के रूप में नारी चित्राण | 891.43371 ACH Chhilte huwe apne ko = छीलते हुए अपने को |
युवराज चूण्डा का प्रस्थान-बिन्दु इतिहास है— राजपूत काल का इतिहास। उपन्यासकार का उद्देश्य न तो सिर्फ व्यतीत हो चुके समय का चित्रण करना है, और न ही उस काल के यथार्थ की अनदेखी कर उसका आकर्षक किन्तु अयथार्थ चित्र प्रस्तुत करना—ऐतिहासिक कथा का आवरण लेकर भी उसने इस देश की उस चारित्रिक विशेषता का उद्घाटन करने का प्रयत्न किया है जो न केवल हमारी वर्षों की गुलामी का कारण बनी रही, बल्कि आज भी वह किसी-न-किसी रूप में हमारी जड़ों में घुन की तरह लगी है—“वैसे अगर राजस्थान के राजपूत राजा संयुक्त रूप से दिल्ली की बादशाहत पर आक्रमण करते तो वे उसका अन्त कर सकते थे, लेकिन आपसी कलह और विग्रह के कारण यह सम्भव नहीं था।”
‘युवराज चूण्डा’ की कहानी वस्तुत: नितान्त कुरूप यथार्थ के परिवेश में आदर्शवाद की कहानी है, जो आज भी न केवल अत्यन्त पठनीय है बल्कि कहीं अधिक प्रासंगिक भी।
https://rajkamalprakashan.com/yuvraj-chunda.html
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