Bagoogoshe=बागूगोशे
Publication details: Delhi: Vani Prakashan, 2024.Description: 207p.: hbk.; 23 cmISBN:- 9789357756433
- 891.43371 DEE
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.43371 DEE (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 034872 |
बगूगोशे की खुर्दरी ज़मीन में दीपक ने जिन भौगोलिक, ऐतिहासिक, स्थानीय और सामाजिक घटित को उकेरा और उघाड़ा वह विस्मयकारी है। स्वदेश दीपक के इन बगूगोशों की फाँकों का रसीलापन पाठकों के दिल-दिमाग़ में देर तक ताज़ा रहेगा।'
-कृष्णा सोबती
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इन कहानियों में यादें हैं और विस्मृतियाँ भी, विश्वास कर लेने का साहस है तो अविश्वास का सलीका भी, मिठास है तो कसैलापन भी है। ऊपर से शान्त और एकसार दिखने वाली सतह को स्वदेश दीपक इस तरह उधेड़ते हैं कि भीतर का सारा विद्रूप, सारी दरारें और बदसूरती साफ़ दिखने लगती है।
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मैंने माँ से पूछा, “कुछ खाने को दूँ?”
“हाँ काका, बाज़ार से बगूगोशे ले आ । बड़ा दिल कर रहा है।" मैं बिल्कुल हैरान। यह शब्द पहली बार जो सुना है।
"बगूगोशे क्या? सीधा नासपाती कहो ।"
“नाखाँ गोल होती हैं। बगूगोशे पूँछ की तरफ से लम्बे और रस ही रस। पिण्डी में जब हकीम जी गुस्सा करते थे तो शाम को थैला भर बगूगोशे ले आते थे। अब औरत के अपने नखरे। न की तो समझाया था 'खा ले बीबी। शायद तेरी जीभ में मिठास आ जाये। है तो तू हथियारों का कारख़ाना। "
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