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Bass bahut ho chuka=बस्स ! बहुत हो चुका

By: Publication details: Delhi: Vani Prakashan, 2024.Edition: 3rd edDescription: 103p.: hbk.; 23 cmISBN:
  • 9788170555216
Subject(s): DDC classification:
  • 891.4317 VAL
Summary: समीक्षकों की नज़र में वाल्मीकि की कविताएँ - हिन्दी दलित साहित्य की चर्चित एवं बहुप्रशंसित कृति दलित जीवन के दाहक-अनुभवों, संघर्षों की सशक्त अभिव्यक्ति । जिसे पाठकों ने ही नहीं समीक्षकों, आलोचकों, विद्वानों ने दलित-चेतना की महत्त्वपूर्ण कृति माना । 'सदियों का सन्ताप' काव्य पुस्तक बहुत छोटी है, परन्तु गुणात्मक दृष्टि से अभिव्यक्ति में बेहद सशक्त है। - डॉ. धर्मवीर ★★★ संग्रह की हर कविता मेरा बयान लगती है। मेरी पीड़ा और प्रश्न इन कविताओं में दिखायी दिये। - शरणकुमार लिंबाले ★★★ संग्रह की कविताएँ पढ़कर लगा कि हिन्दी कविता मर गयी थी, वह जन्म ले रही है। - डॉ. मस्तराम कपूर ★★★ सचमुच संग्रह की कविताएँ ज्वालामुखी बनकर सदियों का सन्ताप उगल रही हैं और एक नयी सोच को जन्म दे रही हैं। - डॉ. श्याम सिंह शशि ★★★ कविताओं में भावाकुलता है और शब्द तथा भावना को एकाकार कर सकने की दुर्धर्ष जिजीविषा । - बटरोही https://vaniprakashan.com/home/product_view/4346/Bass-Bahut-Ho-Chuka
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समीक्षकों की नज़र में वाल्मीकि की कविताएँ -

हिन्दी दलित साहित्य की चर्चित एवं बहुप्रशंसित कृति दलित जीवन के दाहक-अनुभवों, संघर्षों की सशक्त अभिव्यक्ति । जिसे पाठकों ने ही नहीं समीक्षकों, आलोचकों, विद्वानों ने दलित-चेतना की महत्त्वपूर्ण कृति माना ।

'सदियों का सन्ताप' काव्य पुस्तक बहुत छोटी है, परन्तु गुणात्मक दृष्टि से अभिव्यक्ति में बेहद सशक्त है।

- डॉ. धर्मवीर

★★★

संग्रह की हर कविता मेरा बयान लगती है। मेरी पीड़ा और प्रश्न इन कविताओं में दिखायी दिये।

- शरणकुमार लिंबाले

★★★

संग्रह की कविताएँ पढ़कर लगा कि हिन्दी कविता मर गयी थी, वह जन्म ले रही है।

- डॉ. मस्तराम कपूर

★★★

सचमुच संग्रह की कविताएँ ज्वालामुखी बनकर सदियों का सन्ताप उगल रही हैं और एक नयी सोच को जन्म दे रही हैं।

- डॉ. श्याम सिंह शशि

★★★

कविताओं में भावाकुलता है और शब्द तथा भावना को एकाकार कर सकने की दुर्धर्ष जिजीविषा ।

- बटरोही

https://vaniprakashan.com/home/product_view/4346/Bass-Bahut-Ho-Chuka

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