Kabir ke aalochak=कबीर के आलोचक
Publication details: Delhi: Vani Prakashan, 2024.Edition: 4th edDescription: 114p.: hbk.; 22 cmISBN:- 9788170555469
- 891.4309 DHA
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.4309 DHA (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 034810 |
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| 891.4309 BHU Madhyakalin hindi sahitya ka itihas =मध्यकालीन हिंदी साहित्य का इतिहास | 891.4309 CHA Bhupen Khakhkhar: ek antrang sansmaran = भूपेन खख्खर: एक अंतरंग संस्मरण | 891.4309 CHA Bura waqt achchhe log = बुरा वक्त अच्छे लोग | 891.4309 DHA Kabir ke aalochak=कबीर के आलोचक | 891.4309 DIN Sahityamukhi = साहित्यमुखी | 891.4309 DIN Sansmaran aur shradhanjaliyan = संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ | 891.4309 DIN Venuvan = वेणुवन |
यह पुस्तक कबीर पर मेरी बड़ी योजना का एक हिस्सा है। इसमें मैंने कबीर के ब्राह्मणवादी समीक्षकों को समझना चाहा है। इसमें पता चलता है कि ब्राह्मणवादी समीक्षकों ने कबीर के दर्शन और सामाजिक सन्देश के प्रति तनिक भी सम्मान नहीं बरता । उन्होंने कबीर की नहीं बल्कि कबीर के भीतर रामानन्द ब्राह्मण को बैठाकर उसकी प्रशंसा की है। मूल कबीर से ये सभी बचते हैं। इनकी यह भी कोशिश रही है कि कहीं यह सिद्ध न हो जाये कि कबीर दलितों के किसी पुराने धर्म के प्रचारक या अपने किसी नये धर्म के प्रवर्तक थे। उन सबका उद्देश्य इस सम्भावना पर रोक लगाना है कि हिन्दू धर्म को छोड़कर भारत के दलितों का कोई नया या अलग धर्म भी हो सकता है।
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