Sansar mein Nirmal Verma: poorvarddh=संसार में निर्मल वर्माः पूर्वार्द्ध
Publication details: New Delhi: Rajkamal Prakashan, 2024.Description: 198p.: hbk.: 22 cmISBN:- 9789360861773
- 891.43871 VER
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.43871 VER (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 034780 |
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| 891.43871 PAR Jaise unke din phire = जैसे उनके दिन फिरे | 891.43871 PAR Rani nagfani ki kahani = रानी नागफनी की कहानी | 891.43871 SIN Aamne-saamne | 891.43871 VER Sansar mein Nirmal Verma: poorvarddh=संसार में निर्मल वर्माः पूर्वार्द्ध | 891.43871 VER Sansar mein Nirmal Verma: uttararddh=संसार में निर्मल वर्माः उत्तरार्द्ध | 891.4387109 CHA Subhadra Kumari Chauhan: srijan evam chintan = सुभद्रा कुमारी चौहान: सृजन एवं चिन्तन | 891.439 SHA Aj ke prasiddh shayar = आज के प्रसिद्ध शायर |
इतिहास के भीतर जो घटनाएँ होती है, उनके पीछे कोई बहुत ही (अति पवित्र) सर्वमान्य नियम हो, ऐसा कोई ज़रूरी नही है। यह बोध जब आपको हो जाए तो यह ज़रूरी हो जाता है हम सृष्टि के अर्थ को ईश्वर या इतिहास में न देखकर उसे अपने नैतिक अर्थ में पाएँ, और मनुष्य ख़ुद इस नैतिकता का निर्माण करे। इस पुस्तक में शामिल एक साक्षात्कार में अस्तित्ववाद को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए निर्मल वर्मा आगे कहते हैं कि उस दर्शन से जो बहुमूल्य चीज़ मैंने अपने लिए पाई वह यह कि ईश्वर और इतिहास से मुक्त होकर, यह आदमी पर निर्भर है कि वह अर्थ और नैतिकता को जन्म दे; क्या सही है, क्या ग़लत है, इसे तय करने की ज़िम्मेदारी वह ख़ुद उठाए।
अपनी रचना प्रक्रिया और लेखकीय नैतिकता के अलावा इन साक्षात्कारों में वे अपने विदेश प्रवास, वहाँ के निर्णायक अनुभवों, साहित्य, कला, विचारधारा और अन्य अनेक ऐसे मुद्दों पर अपनी बात कहते हैं जो आज भी प्रासंगिक और विचारोत्तेजक हैं। इस जिल्द में उनके 1998 से पहले दिए गए साक्षात्कारों को संकलित किया गया है। इसके बाद के साक्षात्कार ‘संसार में निर्मल वर्मा’ के ‘उत्तरार्द्ध’ खंड में संकलित हैं।
https://rajkamalprakashan.com/sansar-mein-nirmal-verma-poorvarddh.html
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