Aadhe adhure = आधे अधूरे
Publication details: Radhakrishna Paperbacks, 2022 Delhi:Description: 119p.; pbk; 22cmISBN:- 9788183618564
- 891.43271 RAK
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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IIT Gandhinagar | General | 891.43271 RAK (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 032223 |
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| 891.43271 JOS Ab tak sab = अब तक सब | 891.43271 MIS Antigoni = एंटीगोनी | 891.43271 PRA Dhruvaswamini =ध्रुवस्वामिनी | 891.43271 RAK Aadhe adhure = आधे अधूरे | 891.43271 RAK Lahron ke rajhans = लहरों के राजहंस | 891.43271 SIN Dusman: urf sainya magan pahalwani mein = दुस्मन : उर्फ़ सैंया मगन पहलवानी में | 891.43271 SIN Hasya ekanki = हास्य एकांकी |
Includes authors introduction
आधे–अधूरे आज के जीवन के एक गहन अनुभव–खंड को मूर्त करता है । इसके लिए हिंदी के जीवंत मुहावरे को पकड़ने की सार्थक, प्रभावशाली कोशिश की गई है । इस नाटक की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विशेषता इसकी भाषा है । इसमें वह सामर्थ्य है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके । शब्दों का चयन, उनका क्रम, उनका संयोजनµसबकुछ ऐसा है, जो बहुत संपूर्णता से अभिप्रेत को अभिव्यक्त करता है । लिखित शब्द की यही शक्ति और उच्चारित ध्वनि–समूह का यही बल है, जिसके कारण यह नाट्य–रचना बंद और खुले, दोनों प्रकार के मंचों पर अपना सम्मोहन बनाए रख सकी । यह नाट्यलेख, एक स्तर पर स्त्री–पुरुष के बीच के लगाव और तनाव का दस्तावेज“ है–––दूसरे स्तर पर पारिवारिक विघटन की गाथा है । एक अन्य स्तर पर यह नाट्य–रचना मानवीय संतोष के अधूरेपन का रेखांकन है । जो लोग जिं“दगी से बहुत कुछ चाहते हैं, उनकी तृप्ति अधूरी ही रहती है । एक ही अभिनेता द्वारा पाँच पृथक् भँ निभाए जाने की दिलचस्प रंगयुक्ति का सहारा इस नाटक की एक और विशेषता है । संक्षेप में कहें तो आधे–अधूरे समकालीन जिन्दगी का पहला सार्थक हिंदी नाटक है । इसका गठन सुदृढ़ एवं रंगोपयुक्त है । पूरे नाटक की अवधारणा के पीछे सूक्ष्म रंगचेतना निहित है ।
https://www.amazon.in/-/hi/Mohan-Rakesh/dp/8171199054
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