Ab tak sab = अब तक सब
Publication details: Rajkamal Prakshan, 2022. New Delhi:Description: 382p.; hbk; 23cmISBN:- 9788126704064
- 9789393768247
- 891.43271 JOS
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
Hindi Books
|
IIT Gandhinagar | General | 891.43271 JOS (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 032225 |
Browsing IIT Gandhinagar shelves,Collection: General Close shelf browser (Hides shelf browser)
|
|
|
|
|
|
|
||
| 891.43271 DEE Kaal kothri=काल कोठरी | 891.43271 DIN He Ram = हे राम! | 891.43271 GAR Jadoo ka kaleen = जादू का कालीन | 891.43271 JOS Ab tak sab = अब तक सब | 891.43271 MIS Antigoni = एंटीगोनी | 891.43271 PRA Dhruvaswamini =ध्रुवस्वामिनी | 891.43271 RAK Aadhe adhure = आधे अधूरे |
Includes authors introduction
यह सुखद है कि राजेश जोशी के लगभग सभी नाटक, लिखने के साथ ही मंचित हुए और मंचीय प्रदर्शनों की सफलता के बाद प्रकाशित हुए। निश्चित रूप से इनकी रचना प्रदर्शन की अपेक्षाओं के अनुरूप हुई है इसलिए इनका पहना प्रभाव तो मंचीयता का ही पड़ता है। नाटक पढ़ते समय पाठक, दर्शक की भूमिका में चला जाता है और भले ही वह सिर्फ पाठ से गुजरता हो, प्रस्तुति का अन्तर्भूत प्रभाव उसे बाँधे रहता है। नाटक की आलोचना की भाषा में कहें तो यह विशेषता ‘चाक्षुषता के साथ-साथ दृश्यात्मकता’ की है। राजेश जोशी के लगभग सभी नाटकों में 'भाषा की पूरी शक्ति, उसकी पूरी अर्थवत्ता काव्यात्मकता' तक पहुँचने में है जिसे विख्यात नाट्य चिन्तक नेमिचन्द्र जैन एक सफल नाट्यालेख का सबसे बड़ा गुण या उसकी बड़ी चुनौती स्वीकार करते हैं। कहना न होगा कि नेमि जी नाटक को मूलतः काव्य का एक प्रकार ही मानते थे और एक नाट्यालेख में वे ‘सार्थक और महत्वपूर्ण अनुभूति की सूक्ष्म, संवेदनशील और गहन अभिव्यक्ति' का होना आवश्यक मानते थे।
इस दृष्टि से देखें तो राजेश जोशी के अधिकांश नाटक नाट्यालेख की अनिवार्य अर्हताएँ पूरी करते हैं और सम्बद्ध विषय की सूक्ष्मतम अनुभूति तथा संवेदनशील और गहन अभिव्यक्ति संभव करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उनका जोर ‘संवाद’ और ‘दृश्यात्मकता’ को उभारने में रहा है जो पाठ को तो अर्थगर्भी बनाते ही हैं, मंचन को उसके पूरे वितान में खुलने का अवसर देते हैं।
—ज्योतिष जोशी
https://rajkamalprakashan.com/ab-tak-sab.html
There are no comments on this title.