Thithurata huaa gantantra = ठिठुरता हुआ गणतंत्र
Publication details: Rajkamal Paperbacks, 2022. New Delhi:Description: 127p.; pbk; 22cmISBN:- 9788126730810
- 891.43871 PAR
| Item type | Current library | Collection | Call number | Copy number | Status | Barcode | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
Hindi Books
|
IIT Gandhinagar | General | 891.43871 PAR (Browse shelf(Opens below)) | 1 | Available | 032188 |
Browsing IIT Gandhinagar shelves,Collection: General Close shelf browser (Hides shelf browser)
|
|
|
|
|
|
No cover image available | ||
| 891.43871 PAR Vikalang shraddha ka daur = विकलांग श्रद्धा का दौर | 891.43871 PAR Awara bheed ke khatare = आवारा भीड़ के खतरे | 891.43871 PAR Tulsidas chandan ghisain = तुलसीदास चन्दन घिसैं | 891.43871 PAR Thithurata huaa gantantra = ठिठुरता हुआ गणतंत्र | 891.43871 PAR Kahat kabeer = क़हत कबीर | 891.43871 PAR Kaag bagodha = काग भगोड़ा | 891.43871 PAR Jaise unke din phire = जैसे उनके दिन फिरे |
Includes authors introduction
परसाई हँसाने की हड़बड़ी में नहीं होते। वे पढ़नेवाले को देवता नहीं मानते, न ग्राहक, सिर्फ़ एक नागरिक मानते हैं, वह भी उस देश का जिसका स्वतंत्रता दिवस बारिश के मौसम में पड़ता है और गणतंत्र दिवस कड़ाके की ठंड में। परसाई की निगाह से यह बात नहीं बच सकी तो सिर्फ़ इसलिए कि ये दोनों पर्व उनके लिए सिर्फ़ उत्सव नहीं, सोचने-विचारने के भी दिन हैं। वे नहीं चाहते कि इन दिनों को सिर्फ़ थोथी राष्ट्र-श्लाघा में व्यर्थ कर दिया जाए, जैसा कि आम तौर पर होता है।
देखने का यही नज़रिया परसाई को परसाई बनाता है और हिन्दी व्यंग्य की परम्परा में उन्हें अलग स्थान पर प्रतिष्ठित करता है। प्रचलित, स्वीकृत और उत्सवीकृत की वे बहुत निर्मम ढंग से चीर-फाड़ करते हैं। इसी संग्रह में 'इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर' शीर्षक व्यंग्य में वे भारतीय पुलिस की स्थापित सामाजिक सत्ता को ढेर-ढेर कर देते हैं। परसाई को राजनीतिक व्यंग्य के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है, लेकिन इस संग्रह में उनके सामाजिक व्यंग्य ज़्यादा रखे गए हैं। इन्हें पढ़कर पाठक सहज ही जान सकता है कि सिर्फ़ राजनीतिक विडम्बनाएँ ही नहीं, समाज ने जिन दैनिक प्रथाओं और मान्यताओं को अपनी जीवन-शैली माना है, उनकी खाल-परे छिपे पिस्सुओं को भी वे उतने ही कौशल से देखते और झाड़ते हैं।
परसाई का अपना एक बड़ा पाठक वर्ग हमेशा से रहा है जो उनकी तीखी बातें सुनकर भी उन्हें पढ़ता रहा है। इस संग्रह की यह प्रस्तुति निश्चय ही उन्हें सुखद लगेगी।
https://rajkamalprakashan.com/thithurata-huaa-gantantra.html
There are no comments on this title.