Udhar ki zindagi=उधार की जिंदगी
Kardam, Jaiprakash
Udhar ki zindagi=उधार की जिंदगी - Delhi: Vani Prakashan, 2024. - 168p." hbk: 22 cm.
इस जगत् से प्राप्त अनुभूतियों-स्वानुभूतियों को मूर्त रूप देने में जयप्रकाश कर्दम के यहाँ जो उद्यम दिखता है, वह दृष्टि, कथ्य और भाषा के स्तर पर इन्हें अपने दलित अहान में औरों से अलग ही नहीं करता, विशिष्ट भी बनाता है।
कर्दम जी के नये कहानी-संग्रह का नाम है उधार की ज़िन्दगी। नाम से ही पता चलता है कि संकलित कहानियाँ युगों की पीड़ा और संघर्ष के किस गह्वर से गुज़रने का परिचय देने वाली हैं, और हमारी उनसे संवाद की कसौटी क्या होगी!
संग्रह की पहली कहानी ही पुस्तक-शीर्षक है। यह कहानी बताती है कि गाँवों में सामन्ती ढाँचा भले ढह गया हो लेकिन सोच अभी भी शेष है, इसलिए जाति-भेद अपनी जगह खाड़ । तभी तो दलित सवर्णों की तरह पर्व-त्योहार में खुशियाँ मनाने या शादी-ब्याह में घोड़ी पर बारात निकालने की सोचें तो हज़ार मुसीबतें, क्योंकि यह सीधे-सीधे बराबरी को चुनौती। बावजूद वे ऐसा करते हैं, उनसे मिलने वाले काम बन्द होंगे ही, उनके खेतों में शौच करने पर रोक होगी ही, खून-ख़राबे की भी नौबत। पुरानी पीढ़ी भुक्तभोगी है, दुश्मनी मोल लेने को तैयार नहीं, लेकिन नयी पीढ़ी तैयार, वह अपने को लोकतान्त्रिक देश का नागरिक जो मानती है। वह जानती है, संविधान उसे बराबरी का हक़ देता है। इसलिए वह ऐलान करती है, अब हमें नहीं चाहिए उधार की ज़िन्दगी। वह इस बदलाव के लिए 'बहिष्कार' कहानी में पुजारी द्वारा अछूतों के मन्दिर में जाने पर रोक लगाने के कारण यह निर्णय लेने से भी नहीं चूकती कि जब भगवान हमारे लिए नहीं तो ऐसे स्थलों का बहिष्कार करें और अम्बेडकर जैसे उन महापुरुषों के नाम भवन बनायें, जिनके कारण दमित जीवन में बदलाव आया, समानता का अधिकार मिला। और यह अधिकार हर स्तर पर हर युग में बना रहे, इसलिए शिक्षा बहुत ज़रूरी। शिक्षा ही वह दृष्टि है जो 'प्रवचन' कहानी में एक 'बाबा' को अपने वैज्ञानिक तर्कों से निराधार कर पाखण्डी सिद्ध कर पाती है। यह शिक्षा ही जो 'मास्टर धर्मदास' कहानी में धर्मदास को दलित शिक्षक होने के बावजूद बड़ी जातियों की नज़र में भी, महँगी शिक्षा के विरुद्ध गाँव में ही समुचित शिक्षा की व्यवस्था का विकल्प तैयार करने वाला, अपना नायक बनाती है। यह उसी से प्रेरणा कि 'चोर' कहानी का वह दलित पात्र, जिसे सवर्णों के यहाँ भाड़े पर मकान न मिलने की अनेक कठिनाइयाँ, जाति छुपाकर नहीं रहना चाहता कि यह उसके स्वाभिमान के ख़िलाफ़।
https://vaniprakashan.com/home/product_view/8077/Udhar-Ki-Zindagi
9789357756075
Hindi Literaure
Short Stories
Dalit literature
Udhar ki zindagi=उधार की जिंदगी - Delhi: Vani Prakashan, 2024. - 168p." hbk: 22 cm.
इस जगत् से प्राप्त अनुभूतियों-स्वानुभूतियों को मूर्त रूप देने में जयप्रकाश कर्दम के यहाँ जो उद्यम दिखता है, वह दृष्टि, कथ्य और भाषा के स्तर पर इन्हें अपने दलित अहान में औरों से अलग ही नहीं करता, विशिष्ट भी बनाता है।
कर्दम जी के नये कहानी-संग्रह का नाम है उधार की ज़िन्दगी। नाम से ही पता चलता है कि संकलित कहानियाँ युगों की पीड़ा और संघर्ष के किस गह्वर से गुज़रने का परिचय देने वाली हैं, और हमारी उनसे संवाद की कसौटी क्या होगी!
संग्रह की पहली कहानी ही पुस्तक-शीर्षक है। यह कहानी बताती है कि गाँवों में सामन्ती ढाँचा भले ढह गया हो लेकिन सोच अभी भी शेष है, इसलिए जाति-भेद अपनी जगह खाड़ । तभी तो दलित सवर्णों की तरह पर्व-त्योहार में खुशियाँ मनाने या शादी-ब्याह में घोड़ी पर बारात निकालने की सोचें तो हज़ार मुसीबतें, क्योंकि यह सीधे-सीधे बराबरी को चुनौती। बावजूद वे ऐसा करते हैं, उनसे मिलने वाले काम बन्द होंगे ही, उनके खेतों में शौच करने पर रोक होगी ही, खून-ख़राबे की भी नौबत। पुरानी पीढ़ी भुक्तभोगी है, दुश्मनी मोल लेने को तैयार नहीं, लेकिन नयी पीढ़ी तैयार, वह अपने को लोकतान्त्रिक देश का नागरिक जो मानती है। वह जानती है, संविधान उसे बराबरी का हक़ देता है। इसलिए वह ऐलान करती है, अब हमें नहीं चाहिए उधार की ज़िन्दगी। वह इस बदलाव के लिए 'बहिष्कार' कहानी में पुजारी द्वारा अछूतों के मन्दिर में जाने पर रोक लगाने के कारण यह निर्णय लेने से भी नहीं चूकती कि जब भगवान हमारे लिए नहीं तो ऐसे स्थलों का बहिष्कार करें और अम्बेडकर जैसे उन महापुरुषों के नाम भवन बनायें, जिनके कारण दमित जीवन में बदलाव आया, समानता का अधिकार मिला। और यह अधिकार हर स्तर पर हर युग में बना रहे, इसलिए शिक्षा बहुत ज़रूरी। शिक्षा ही वह दृष्टि है जो 'प्रवचन' कहानी में एक 'बाबा' को अपने वैज्ञानिक तर्कों से निराधार कर पाखण्डी सिद्ध कर पाती है। यह शिक्षा ही जो 'मास्टर धर्मदास' कहानी में धर्मदास को दलित शिक्षक होने के बावजूद बड़ी जातियों की नज़र में भी, महँगी शिक्षा के विरुद्ध गाँव में ही समुचित शिक्षा की व्यवस्था का विकल्प तैयार करने वाला, अपना नायक बनाती है। यह उसी से प्रेरणा कि 'चोर' कहानी का वह दलित पात्र, जिसे सवर्णों के यहाँ भाड़े पर मकान न मिलने की अनेक कठिनाइयाँ, जाति छुपाकर नहीं रहना चाहता कि यह उसके स्वाभिमान के ख़िलाफ़।
https://vaniprakashan.com/home/product_view/8077/Udhar-Ki-Zindagi
9789357756075
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