Kaag bagodha = काग भगोड़ा
Parsai, Harishankar
Kaag bagodha = काग भगोड़ा - New Delhi: Vani Prakashan, 2018. - 96p.; pbk; 18cm.
परसाई जी की रचनाएं राजनीति, साहित्य, भ्रष्टाचार, आजादी के बाद का ढोंग, आज के जीवन का अन्तर्विरोध, पाखंड और विसंगतियों को हमारे सामने इस तरह खोलती हैं जैसे कोई सर्जन चाकू से शरीर काट-काटकर गले अंग आपके सामने प्रस्तुत करता है। उसका व्यंग्य मात्र हँसाता नहीं है, वरन् तिलमिलाता है और सोचने को बरबस बाध्य कर देता है।कबीर जैसी उनकी अवधूत और निःसंग शैली उनकी एक विशिष्ट उपलब्धि है और उसी के द्वारा उनका जीवन चिंतन मुखर हुआ है। उनके जैसा मानवीय संवेदना में डूबा हुआ कलाकार रोज पैदा नहीं होता। आजादी के पहले का हिंदुस्तान जानने के लिए सिर्फ प्रेमचन्द पढ़ना ही काफी है, उसी तरह आजादी के बाद की पूरी दस्तावेज परसाई की रचनाओं में सुरक्षित है। चश्मा लगाकर रामचंद्रिका पढ़ाने वाले पेशेवर हिंदी के ठेकेदारों के बावजूद, परसाई का स्थान हिन्दी में हमेशा-हमेशा के लिए सुरक्षित है।
https://www.amazon.in/Kaag-Bagodha-Harishankar-Parsai/dp/9350001411
9789350001417
Hindi literature
891.43871 / PAR
Kaag bagodha = काग भगोड़ा - New Delhi: Vani Prakashan, 2018. - 96p.; pbk; 18cm.
परसाई जी की रचनाएं राजनीति, साहित्य, भ्रष्टाचार, आजादी के बाद का ढोंग, आज के जीवन का अन्तर्विरोध, पाखंड और विसंगतियों को हमारे सामने इस तरह खोलती हैं जैसे कोई सर्जन चाकू से शरीर काट-काटकर गले अंग आपके सामने प्रस्तुत करता है। उसका व्यंग्य मात्र हँसाता नहीं है, वरन् तिलमिलाता है और सोचने को बरबस बाध्य कर देता है।कबीर जैसी उनकी अवधूत और निःसंग शैली उनकी एक विशिष्ट उपलब्धि है और उसी के द्वारा उनका जीवन चिंतन मुखर हुआ है। उनके जैसा मानवीय संवेदना में डूबा हुआ कलाकार रोज पैदा नहीं होता। आजादी के पहले का हिंदुस्तान जानने के लिए सिर्फ प्रेमचन्द पढ़ना ही काफी है, उसी तरह आजादी के बाद की पूरी दस्तावेज परसाई की रचनाओं में सुरक्षित है। चश्मा लगाकर रामचंद्रिका पढ़ाने वाले पेशेवर हिंदी के ठेकेदारों के बावजूद, परसाई का स्थान हिन्दी में हमेशा-हमेशा के लिए सुरक्षित है।
https://www.amazon.in/Kaag-Bagodha-Harishankar-Parsai/dp/9350001411
9789350001417
Hindi literature
891.43871 / PAR